हम अपने दिल के मुकामात से हैं बेगाने;
इसी में वरना हरम है, इसी में बुतखाने!

मुकामात = स्थान, घर;
बेगाना = अपरिचित, अनजान;
हरम = काबा, खुदा का घर;
बुतखाना - मंदिर, मूर्तिगृह
~ Shad Azeembadi
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दिल में किसी के राह किए जा रहा हूँ मैं;
कितना हसीं गुनाह किए जा रहा हूँ मैं!
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जहान-ए-रंग-ओ-बू में क्यों तलाश-ए-हुस्न हो मुझको;
हजारों जलवे रख्शिंदा है मेरे दिल के पर्दे में!

जहान-ए-रंग-ओ-बू = रंग और खुश्बू की दुनिया,
जलवा = नज्जारा,
दृश्य, तमाशा,
रख्शिंदा = चमकने वाले, दीप्त, प्रकाशमान
~ Shakeel Badayuni
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ईमां गलत, उसूल गलत, इद्देआ गलत;
इन्सां की दिलदेही अगर इन्सां न कर सके!

ईमां = धर्म, मजहब
इद्देआ = इच्छा, चाह
दिलदेही = दिलासा, सांत्वना, ढाढस
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दिल को बर्बाद किये जाती है गम बदस्तूर किये जाती है;
मर चुकीं सारी उम्मीदें, आरजू है कि जिये जाती है!

बदस्तूर = पहले की तरह, यथावत, यथापूर्व
~ Asar Lakhnavi
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दिल के लिए हयात का पैगाम बन गयीं;
बैचैनियाँ सिमट के तेरा नाम बन गयीं!

हयात = जिन्दगी, जीवन
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क्या बताऊँ किस क़दर ज़ंजीर-ए-पा साबित हुए;
चंद तिनके जिन को अपना आशियाँ समझा था मैं!

ज़ंजीर-ए-पा = पैरों की ज़ंज़ीर
~ Jigar Moradabadi
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दिल गया रौनक़-ए-हयात गई;
ग़म गया सारी क़ायनात गई!

हयात = ज़िन्दगी
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लुत्फ-ए-बहार कुछ नहीं गो है वही बहार;
दिल क्या उजड़ गया कि जमाना उजड़ गया!

लुत्फ: आनन्द, मजा
~ Arzoo Lakhnavi
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दुनिया के सितम याद न अपनी ही वफ़ा याद;
अब मुझ को नहीं कुछ भी मोहब्बत के सिवा याद!
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