प्रत्येक आत्मा स्वयं में सर्वज्ञ और आनंदमय है! आनंद बाहर से नहीं आता!
~ Lord Mahavira
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जब भी आप कुछ निर्मित करना चाहें, बाह्य स्रोत पर निर्भर मत करिए: अन्दर गहराई तक जाइए और अनंत स्रोत को खोजिये।
~ Shree Paramhansa Yogananda
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मन को केवल कुछ चीजें ही याद रहती हैं। शरीर को सबकुछ याद रहता है। जो सूचना ये रखता है वो अस्तित्व के प्रारम्भ तक जाती हैं।
~ Sadhguru Jaggi Vasudev
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ज्ञानी व्यक्ति ज्ञान और कर्म को एक रूप में देखता है, वही सही मायने में देखता है!
~ Srimad Bhagavad Gita
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जैसे एक फूल बहुत प्यारा और सुंदर है, पर खुशबू नहीं है। ठीक वैसे किसी की कही हुई अच्छी बातें व्यर्थ हैं, अगर वो उनको अमल में नहीं लाता।
~ Buddha
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जब स्वभाव को धर्म के सिद्धांतों के अनुसार बदला जाता है, तब हमें संस्कृति और सभ्यता प्राप्त होती है।
~ Pundit Deendayal Upadhyaya
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सबसे उत्तम तीर्थ अपना मन है जो विशेष रूप से शुद्ध किया हुआ हो!
~ Swami Shankaracharya
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जो लोग परमात्मा तक पहुंचना चाहते हैं उन्हें वाणी मन इन्द्रियों की पवित्रता और एक दयालु ह्रदय की आवश्यकता होती है!
~ Swami Vivekananda
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भगवान के चेहरे पर एक मुस्कुराहट है!
~ Psalm 42:5
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आपकी दया मेरी सामाजिक स्थिति है!
~ Guru Nanak Dev Ji
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