साला समझ नहीं आ रहा है ये मौसम कौन सा चल रहा है!
मच्छर काट रहे हैं
कम्भ्ल भी औढ रहे हैं
पंखा भी चला रहे हैं
नहा भी गरम पानी से रहे हैं
और पी ठंडा पानी रहे हैं
लगता है कोनो फिरकी ले रहा है!
Picture SMS 94423
प्रिय दिसंबर,
तुम कृपा वापिस आ जाओ, तुम तो सिर्फ नहाने नहीं देते थे।
जनवरी तो हाथ भी धोने नहीं दे रहा।
Picture SMS 93907
आज सुबह-सुबह बहुत खतरनाक सपना देखा...
.
.
.
.
.
.
.
"मैं कूलर के सामने सो रहा हूँ!"
Picture SMS 93471
हमारे प्रदेश में किसी भी पार्टी की लहर नहीं है!
यहाँ सिर्फ शीतलहर चल रही है!
Picture SMS 93163
रात को ज़ोरदार ठण्ड लगी तो मैंने योगी जी का फार्मूला आज़माया!
दिसम्बर का नाम बदलकर अप्रैल रख दिया!
ठण्ड फुर्र!
Picture SMS 93095
सबसे महत्त्वपूर्ण होता है वक़्त
देख लीजिए कल पंखे सगे थे और आज रजाईयां अपनी सी लगने लगी हैं!
Picture SMS 92784
ठण्ड मैं एक और समस्या होती है
छाँव मैं बैठ जाओ तो ठण्ड लगने लगती है
और धुप मैं बैठ जाओ तो मोबाइल का डिस्प्ले नहीं दीखता।
Picture SMS 92661
जैसे जैसे सर्दी आ रही है वैसे वैसे सुबह के टाइम बिस्तर का गुरुत्वाकर्षण भी बढ़ता जा रहा है!
Picture SMS 92510
समझ नहीं आ रहा ये मौसम कौन सा चल रहा है!
मच्छर काट रहे हैं... कम्बल भी ओढ़ रहे हैं... पंखा भी चला रहे हैं और पी ठंडा पानी रहे हैं!
लगता है कोनो फिरकी ले रहा है!
Picture SMS 91949
इस बार गर्मी का भी मन है कि दिपावली देख कर ही जाउंगी!
Picture SMS 91878
Analytics