वो आज मशहूर हो गए जो कभी काबिल न थे;
और मंजिले उनको मिली जो दौड़ में कभी शामिल न थे!
न इब्तिदा की ख़बर है न इंतिहा मालूम;
रहा ये वहम कि हम हैं सो वो भी क्या मालूम!
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परख से कब जाहिर हुई शख्सियत किसी की;
हम तो बस उन्हीं के हैं, जिन्हें हम पर यकीन है!
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ख़िज़ां की रुत में गुलाब लहजा बनाके रखना, कमाल ये है;
हवा की ज़द पे दिया जलाना, जला के रखना, कमाल ये है!

ख़िज़ां - पतझड़
~ Mubarak Siddiqui
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रिश्तों को जेबों में नहीं हुजूर दिलों में रखिये;
क्योंकि वक्त से शातिर कोई जेब कतरा नहीं होता!
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दिल की बेताबी नहीं ठहरने देती है मुझे;
दिन कहीं रात कहीं सुब्ह कहीं शाम कहीं!
~ Nazeer Akbarabadi
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हमारी तो तासीर ही यूँ है तावीजों की तरह;
जिसके भी गले मिलते हैं उसकी बरकत हो जाती है!
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सच के हक़ में खड़ा हुआ जाए;
जुर्म भी है, तो ये किया जाए;
हर मुसाफ़िर को ये शऊर कहाँ;
कब रुका जाए, कब चला जाए!
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रहने दे उधार इक मुलाकात यूँ ही;
सुना है उधार वालों को लोग भुलाया नहीं करते!
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सुना है आज समंदर को बड़ा गुमान आया है,
उधर ही ले चलो कश्ती जहाँ तूफान आया है।
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