अपनापन झलके जिसकी आँखों में;
कुछ ही शख्स होते है लाखों में!
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कोई आदत, कोई बात, या सिर्फ मेरी खामोशी;
कभी तो, कुछ तो, उसे भी याद आता होगा!
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तुझे बाँहों में भर लेने की ख़्वाहिश यूँ उभरती है;
कि मैं अपनी नज़र में आप रुस्वा हो सा जाता हूँ।

रुस्वा = बदनाम
~ Jaan Nisar Akhtar
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मोम के पास कभी आग को लाकर देखूँ;
सोचता हूँ कि तुम्हें हाथ लगा कर देखूँ!
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बरसों बाद भी, तेरी ज़िद्द की आदत ना बदली;
काश हम मोहब्बत नहीं, तेरी आदत होते!
Picture SMS 80392
पलकों में आँसू और दिल में दर्द सोया है;
हँसने वालों को क्या पता रोने वाला किस कदर रोया है;
ये तो बस वो ही जान सकता है, मेरी तन्हाई का आलम;
जिसने ज़िंदगी में, किसी को पाने से पहले खोया हो!
Picture SMS 80008
काश! मैं भी पानी का एक घूँट होता;
तेरे होंठों से लगता और तेरी रग-रग में समा जाता!
Picture SMS 79092
हमारे बगैर भी आबाद थीं महफिलें उनकी;
और हम समझते थे कि उनकी रौनकें हम से है!
ताश के पत्ते तो खुशनसीब है यारों;
बिखरने के बाद उठाने वाला तो कोई है!
हम भी मुस्कुराते थे कभी बेपरवाह अंदाज से;
देखा है खुद को आज पुरानी तस्वीरों में!
Picture SMS 77882
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