फूल की पती से कट सकता है हीरे का जिगर;
मर्दे नादाँ पर कलाम-ऐ-नरम-ऐ-नाज़ुक बेअसर!
Picture SMS 92927
खुशबू की तरह आया वो तेज़ हवाओं में;
माँगा था जिसे हम ने दिन रात दुआओं में;
तुम चाट पे नहीं आये मैं घर से नहीं निकल;
यह चाँद बहुत भटकता है सावन की घटाओं में!
Picture SMS 92879
तुम्हारे साथ खामोश भी रहूँ तो बातें पूरी हो जाती हैं;
तुम में, तुम से, तुम पर ही मेरी दुनिया पूरी हो जाती है!
Picture SMS 92547
हमेशा फूलों की तरह, अपनी आदत से बेबस रहिये;
तोडने वाले को भी, खुशबू की सजा देते रहिये!
Picture SMS 92302
ना जाने जिंदगी का, ये कैसा दौर है,
इंसान खामोश है, और ऑनलाइन कितना शोर है।
Picture SMS 92204
थोड़ा सा बचपन साथ रखियेगा जिंदगी की शाम में,
उम्र महसूस ही न होगी, सफ़र के आखरी मुकाम में!
Picture SMS 92159
खुदा तो इक तरफ, खुद से भी कोसों दूर होता है,
बशर जिस वक्त ताकत के नशे में चूर होता है!

बशर - मानव
Picture SMS 92110
चंद तस्वीर-ऐ-बुताँ, चंद हसीनों के खतूत;
बाद मरने के मेरे घर से यह सामान निकला!
~ Mirza Ghalib
Picture SMS 92078
गलतफहमी से बढ़कर दोस्ती का दुश्मन नहीं कोई,
परिंदों को उड़ाना हो तो बस शाख़ें हिला दीजिए!
Picture SMS 92077
ये कश्मकश है ज़िंदगी की, कि कैसे बसर करें;
चादर बड़ी करें या, ख़्वाहिशे दफ़न करे!
Picture SMS 92036
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