बरसात में जो ग़म भीग जाते हैं;
मैं धूप में उन्हें सुखाता रहता हूँ!
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ये आइने अब घर के सँवरते क्यूँ नहीं;
वो ज़ुल्फ़ के सायें बिखरते क्यूँ नहीं;
लगता है ऐसे के बिछड़े हैं अभी-अभी;
भूले से भी उन्हें हम भूलते क्यूँ नहीं!
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ख़ुशी और ग़म को समझता नहीं हूँ;
वही है हाल अब जो कहता नहीं हूँ;
ये वादों - कसमों को निभाना क्या है;
मैं तो इक पल भी तुम्हें भूलता नहीं हूँ!
Picture SMS 89169
रिश्तों को शब्दों का मोहताज ना बनाइये,
वो अगर खामोश है तो आप ही आवाज़ लगाइये!
Picture SMS 88998
इजहार गर जुबां से हो तो मजा क्या है;
चाहने वाला जो निगाहों को पढ़े तो बुरा क्या है!
Picture SMS 88923
मसरूफ़ हैं यहाँ लोग, दूसरों की कहानियाँ जानने में;
इतनी शिद्दत से ख़ुद को अगर पढ़ते, तो ख़ुद़ा हो जाते!
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किताब -ए- दिल का कोई भी पन्ना सादा नहीं होता;
निगाह उस को भी पढ़ लेती है जो लिखा नही होता!
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देख कर मेरी आँखें, एक फकीर कहने लगा;
पलकें तुम्हारी नाज़ुक है, खवाबों का वज़न कम कीजिये!
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रुतबा तो खामोशियों का होता है;
अल्फ़ाज़ का क्या वह तो मुकर जाते हैं हालात देखकर।
Picture SMS 88645
बुलबुल के परो में बाज़ नहीं होते;
कमजोर और बुजदिलो के हाथो में राज नहीं होते;
जिन्हें पड़ जाती है झुक कर चलने की आदत;
दोस्तों उन सिरों पर कभी ताज नहीं होते!
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