कलम की नोक पे कहानी रखी है;
मैंने इक ग़ज़ल तुम्हारे सानी रखी है;
इन आँखों को अब क्या कहें हम;
दो प्यालों में शराब पुरानी रखी है!
Picture SMS 89473
ले जा के हमें साँकी जहाँ शाम ढले;
कर जन्नत नसीब खुदा जहाँ जाम चले!
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लड़खड़ाये कदम तो गिरे उनकी बाँहों मे;
आज हमारा पीना ही हमारे काम आ गया।
Picture SMS 88556
जब भी उमड़े हैँ सैलाब तेरे तसव्वुर के,
मयख़ाना गवाह है कैसे हर जाम बेअसर हुआ है!
Picture SMS 88447
आये थे हँसते खेलते मैख़ाने में 'फ़िराक़';
जब पी चुके शराब तो संजीदा हो गए!
~ Firaq Gorakhpuri
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ना बात कर पीने पिलाने की, मेरा ग़ज़लों में मयखाना है;
मैं शायर भी पुराना हूँ, और मेरा तज़ुर्बा भी पुराना है|
Picture SMS 87940
आये थे हँसते खेलते मैख़ाने में 'फ़िराक़';
जब पी चुके शराब तो संजीदा हो गए!
~ Firaq Gorakhpuri
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मयखाने की इज़्ज़त का सवाल था हुज़ूर,
सामने से गुज़रे तो, थोडा सा लड़खड़ा दिए!
Picture SMS 87766
कर दो तब्दील अदालतों को मय खानों में;
सुना है नशे में कोई झूठ नहीं बोलता!
Picture SMS 86901
या हाथों हाथ लो मुझे मानिंद-ए-जाम-ए-मय;
या थोड़ी दूर साथ चलो मैं नशे में हूँ!

मानिंद-ए-जाम-ए-मय: शराब के पात्र की तरह
~ Meer Taqi Meer
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