मेरे फन को तराशा है सभी के नेक इरादों ने;
किसी की बेवफाई ने, किसी के झूठे वादों ने।
Picture SMS 85227
कहाँ दूर हट के जायें, हम दिल की सरजमीं से,
दोनों जहान की सैरें, हासिल हैं सब यहीं से!

सरजमीं = पृथ्वी, जमीन, देश, मुल्क
~ Jigar Moradabadi
Picture SMS 85225
देखकर पलकें मेरी कहने लगा कोई फक़ीर,
इन पे बरख़ुरदार सपनों का वज़न कुछ कम करो!
Picture SMS 85202
रेत की दीवार हूँ गिरने से बचा ले मुझको;
यूँ न कर तेज़ हवाओं के हवाले मुझको;
आ मेरे पास ज़रा देख मोहब्बत से मुझे;
मैं बुरा हूँ तो भलाई से निभा ले मुझको!
Picture SMS 85157
अर्ज़-ए-अहवाल को गिला समझे;
क्या कहा मैंने आप क्या समझे|
~ Daagh Dehlvi
Picture SMS 85137
क्या बेचकर हम खरीदें फुर्सत-ए-जिंदगी;
सब कुछ तो गिरवी पड़ा है जिम्मेदारी के बाजार में।
Picture SMS 85104
एक सुकून की तालाश में, ना जाने कितनी बेचैनियाँ पाल ली;
और लोग कहते हैं, हम बड़े हो गये और ज़िन्दगी संभाल ली।
Picture SMS 85051
किस नाज़ से कहते हैं वो झुंजला के शब-ए-वस्ल;
तुम तो हमें करवट भी बदलने नहीं देते।

शब-ए-वस्ल = मिलन की रात
~ Akbar Allahabadi
Picture SMS 85004
किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल;
कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा!
Picture SMS 84971
अर्ज़-ओ-समा कहाँ तिरी वुसअत को पा सके;
मेरा ही दिल है वो कि जहाँ तू समा सके!

अर्ज़-ओ-समा = धरती और आकाश
वुसअत = विशालता, सम्पूर्णता
~ Khwaja Mir Dard
Picture SMS 84919
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