लोग आजकल के बड़े होशियार हो गये;
ये मत समझना तेरे तरफ़दार हो गये!
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चाँद को अपनी चौकट पे सजाने की तमन्ना ना कर,
ये जमाना तो आँखों से ख्वाब भी छीन लेता है!
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फासला भी जरूरी है, चिराग रौशन करने वक्त;
तजुर्बा ये हुआ हाथ जल जाने के बाद।
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कुछ तो तन्हाई की रातों में सहारा होता;
तुम न होते न सही ज़िक्र तुम्हारा होता!
Picture SMS 87602
सौ बार चमन महका सौ बार बहार आई;
दुनिया की वही रौनक़ दिल की वही तंहाई!
Picture SMS 87577
प्यार करना हर किसी के बस की बात नहीं;
जिगर चाहिए अपनी ही खुशियां बर्बाद करने के लिए।
Picture SMS 87360
कुछ तो मेरे पिंदार-ए-मोहब्बत का भरम रख;
तू भी तो कभौ मुझको मनाने के लिये आ!

पिंदार-ए-मोहब्बत : प्यार का अभिमान
भरम: भ्रम
~ Ahmad Faraz
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बड़ी अजीब सी है शहरों की रौशनी,
उजालों के बावजूद चेहरे पहचानना मुश्किल है!
Picture SMS 87212
हर क़दम पर हम समझते थे कि मंज़िल आ गयी;
हम क़दम पर इक नयी दरपेश मुश्किल आ गयी!

क़दम: पैर
दरपेश: सम्मुख, सामने
~ Hafeez Hoshiarpuri
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लौटा जो सज़ा काट के, वो बिना ज़ुर्म की;
घर आ के उसने, सारे परिंदे रिहा कर दिए!
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