एक सुकून की तालाश में, ना जाने कितनी बेचैनियाँ पाल ली;
और लोग कहते हैं, हम बड़े हो गये और ज़िन्दगी संभाल ली।
Picture SMS 85051
किस नाज़ से कहते हैं वो झुंजला के शब-ए-वस्ल;
तुम तो हमें करवट भी बदलने नहीं देते।

शब-ए-वस्ल = मिलन की रात
~ Akbar Allahabadi
Picture SMS 85004
किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल;
कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा!
Picture SMS 84971
अर्ज़-ओ-समा कहाँ तिरी वुसअत को पा सके;
मेरा ही दिल है वो कि जहाँ तू समा सके!

अर्ज़-ओ-समा = धरती और आकाश
वुसअत = विशालता, सम्पूर्णता
~ Khwaja Mir Dard
Picture SMS 84919
अगर इश्क करो तो आदाब-ए-वफ़ा भी सीखो;
ये चंद दिन की बेकरारी मोहब्बत नहीं होती!
Picture SMS 84844
आज गुमनाम हूँ तो ज़रा फासला रख मुझसे;
कल फिर मशहूर हो जाऊँ तो कोई रिश्ता निकाल लेना!
Picture SMS 84825
आप पहलू में जो बैठें तो सँभल कर बैठें;
दिल-ए-बेताब को आदत है मचल जाने की!

दिल-ए-बेताब = बेचैन दिल
~ Jaleel Manikpuri
Picture SMS 84746
पसंद आ गए हैं कुछ लोगों को हम;
कुछ लोगों को ये बात पसंद नहीं आयी।
Picture SMS 84675
दिल की बिसात क्या थी निगाह-ए-जमाल में;
इक आइना था टूट गया देख-भाल में!
~ Seemab Akbarabadi
Picture SMS 84647
मज़हब, दौलत, ज़ात, घराना, सरहद, ग़ैरत, खुद्दारी;
एक मोहब्बत की चादर को, कितने चूहे कुतर गए।
Picture SMS 84595
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