आज जिस्म में जान है तो देखते नही हैं लोग;
जब रूह निकल जाएगी तो कफन हटा हटा कर देखेंगे लोग!
Picture SMS 83042
हम आह भी करते हैं तो हो जाते हैं बदनाम;
वो क़त्ल भी करते हैं तो चर्चा नहीं होता।
~ Akbar Allahabadi
Picture SMS 82970
मिटा दे अपनी हस्ती को गर कुछ मर्तबा* चाहिए;
कि दाना खाक में मिलकर, गुले-गुलजार होता है|

Meaning:
मर्तबा - इज्जत, पद
~ Allama Iqbal
Picture SMS 82936
लेके तन के नाप को, घूमे बस्ती गाँव;
हर चादर के घेर से, बाहर निकले पाँव।
~ Nida Fazli
Picture SMS 82879
अपनी तबाहियों का मुझे कोई गम नहीं;
तुमने किसी के साथ मोहब्बत निभा तो दी।
~ Sahir Ludhianvi
Picture SMS 82838
दिल की बस्ती अजीब बस्ती है;
लूटने वाले को तरसती है।
~ Allama Iqbal
Picture SMS 82807
मैं अकेला ही चला था जानिबे-मंजिल मगर;
लोग आते गए और कारवां बनता गया।
~ Majrooh Sultanpuri
Picture SMS 82790
आह को चाहिए इक उम्र असर होते तक;
कौन जीता है तिरी ज़ुल्फ़ के सर होते तक।

Meaning:
सर - सुलझाना
~ Mirza Ghalib
Picture SMS 82769
अपनी गली में मुझ को न कर दफ़्न बाद-ए-क़त्ल;
मेरे पते से ख़ल्क़ को क्यों तेरा घर मिले।
~ Mirza Ghalib
Picture SMS 82688
दुनिया करे सवाल तो हम क्या जवाब दें;
तुमको ना हो ख्याल तो हम क्या जवाब दें।
~ Majrooh Sultanpuri
Picture SMS 82663
Analytics