उठकर तो आ गये हैं तेरी बज़्म से मगर;
कुछ दिल ही जानता है कि किस दिल से आये हैं!
~ Faiz Ahmad Faiz
Picture SMS 86140
पूरा भी हो के जो कभी पूरा ना हो सका;
तेरी निगाह का वो तक़ाज़ा है आज तक!
~ Firaq Gorakhpuri
Picture SMS 86059
हर शख्स गुनाहगार है कुदरत के कत्ल में;
ये हवाएं जहरीली यूँ ही नहीं हुई!
Picture SMS 86034
तेरी महफ़िल से उठे तो किसी को खबर तक ना थी;
तेरा मुड़-मुड़ कर देखना हमें बदनाम कर गया!
Picture SMS 85989
बाग़ में ले के जन्म हम ने असीरी झेली;
हम से अच्छे रहे जंगल में जो आज़ाद रहे!
~ Brij Narayan Chakbast
Picture SMS 85940
ख़ुदी वो बहर है जिस का कोई किनारा नहीं;
तू आबजू इसे समझा अगर तो चारा नहीं!
~ Allama Iqbal
Picture SMS 85866
मेरी फितरत को क्या समझेंगे ये ख्वाब-ए-गर्दाँ वाले;
सवेरे के सितारे की चमक है राज़दाँ मेरी!
~ Shamsi Meenai
Picture SMS 85815
अच्छा है दिल के साथ रहे पासबान-ए-अक़्ल;
लेकिन कभी-कभी इसे तन्हा भी छोड़ दे!

पासबान-ए-अक़्ल: बुद्धी का निरीक्षक, Guardian of the mind, Intution
~ Allama Iqbal
Picture SMS 85694
दर पे रहने को कहा और कह के कैसा फिर गया;
जितने अर्से में मेरा लिपटा हुआ बिस्तर खुला!
~ Mirza Ghalib
Picture SMS 85590
हम अपने दिल के मुकामात से हैं बेगाने;
इसी में वरना हरम है, इसी में बुतखाने!

मुकामात = स्थान, घर;
बेगाना = अपरिचित, अनजान;
हरम = काबा, खुदा का घर;
बुतखाना - मंदिर, मूर्तिगृह
~ Shad Azeembadi
Picture SMS 85567
Analytics