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कुछ प्रसिद्ध मुहावरों का सही प्रयोग के लिये विस्तार में विवरण

देवर को नहीं देगी पड़ोसी से फड़वा लेगी - मतलब किसी अपने का भला नहीं सोचने वाला जो किसी वस्तु को व्यर्थ बर्बाद कर देगा पर किसी अपने को नहीं देगा।

इतने तो चुदाई के ना मिले जितने का लहंगा फट गया - इसका अर्थ किसी ऐसे काम से है जिसमें बहुत मेहनत हो और प्रतिफल बहुत कम।

गाण्ड मराये बेगम, दण्ड भरे गुलाम - मतलब किसी के गुनाह की सजा किसी दूसरे को देना यानि चोरों का दण्ड फकीरों को।

पकड़ने का पता नहीं और मुठ का ठेका - यह वाक्य उस वक्त के लिए है जब कोई बिना अनुभव वाला किसी अनुभव की आवश्यकता वाले की जगह को ले लेता है।

साथ भी सोये और गांड भी छुपाये - मतलब बिना कुछ खोये कुछ पाने की आशा करना।

शेर का लण्ड पकड़ना - यानि किसी ऐसे काम में उलझना जिससे छुटकारा पाना भी मुश्किल और करना भी मुश्किल

झाँट उखाड़ने से मुर्दे हल्के नहीं होते - यानि किसी भारी काम को बहुत थोड़ा प्रयास करने से कुछ नहीं होता जैसे ओस चाटने से प्यास नहीं बुझती।
चूतिये चार तरह के होते हैं...

1) नस्लन: ये चूतिये केवल इसलिये चूतिये होते हैं, क्योंकि इनके बाप भी अपने समय के बहुत बड़े चूतिया थे।

2) मसलन: ये वो होते हैं, जिनकी मिसालें दी जाती हैं।

3) शक्लन: यह वो वाले होते हैं, जिनको सिर्फ शक्ल से ही पहचान लिया जाता है। बाकी टेस्ट की जरूरत ही नहीं पड़ती।

4) बकलन: ये वो स्पेशल वैराइटी होती है, जो हर तरह से समझदार लगते हैं; लेकिन एकाएक कुछ ऐसा बोल या कर देते हैं, कि इनको भी चूतिया मानना ही पड़ता है।
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