औरत सच में ही प्रकृति की पेचीदा रचना है:

अगर आप उसे किस्स करते हैं, तो आप सज्जन आदमी नहीं अगर नहीं करते तो आप आदमी ही नहीं!!

अगर आप उसकी तारीफ़ करो तो उसे लगता है कि आप झूठ बोल रहे हो अगर नहीं करो तो आपको कुछ नहीं आता, आप किसी काम के नहीं!!

अगर आप उसकी सारी बातें मानते है तो आप डरपोक अगर नहीं मानते तो तालमेल ही नहीं बिठा पाते!!

अगर आप उससे रोज मिलते हो तो आप बोर करते है अगर आप नहीं मिलते तो आप पर आरोप लगाया जाता है कि आप डबल क्रॉस कर रहे है!!

अगर आप अच्छे कपड़े पहनते हो तो आप प्लेबॉय है अगर नहीं पहनते तो आप आलसी और सुस्त!!

अगर आप एक भी मिनट लेट हो जाओ तो वो शिकायत करती है कि इन्तजार करना कितना मुश्किल होता है अगर वो लेट हो जाए तो कहती है ये लड़कियों का तरीका है! !

अगर आप उसे कभी कभी किस्स करते हैं तो आप रूखें हैं अगर आप रोज किस्स करने कि कोशिश करते हैं तो आप गलत फायदा उठा रहे हो!!

अगर आप बोलते हैं तो वो चाहती है कि आप सुने अगर आप सुन रहे हो तो वो चाहती है कि आप बोले!!

संक्षेप में: दिखने में जितनी सीधी सादी, उतनी ही जटिल जितनी कमजोर उससे कहीं ज्यादा शक्तिशाली!!

जितनी पेचीदा उतनी ही मनभावन, ये नारी सच में अद्भुत है!
नदी में डूबते हुए आदमी ने पुल पर चलते हुए आदमी को आवाज़ लगायी, "बचाओ-बचाओ"।

पुल पर चलते आदमी ने नीचे देखा और उस आदमी को बचाने के लिए पुल से नीचे रस्सी फैंकी और कहा, "रस्सी को पकड़ के ऊपर आ जाओ।"

परन्तु नदी में डूबता हुआ आदमी रस्सी नहीं पकड़ पा रहा था तो वह डर के मारे चिल्ला कर बोला, "मैं मरना नहीं चाहता, ज़िन्दगी बड़ी कीमती है। कल ही तो मेरी टार्जन कंपनी में बड़ी अच्छी नौकरी लगी है।"

इतना सुनते ही पुल पर चलते आदमी ने अपनी रस्सी खींच ली और भागते-भागते टार्जन कंपनी के दफ्तर में गया और वहां के मैनेजर से बोला, "जिस आदमी को आपने कल नौकरी दी थी वो अभी-अभी डूबकर मर गया है, और इस तरह आपकी कंपनी में एक जगह खाली हो गयी है, मैं बेरोजगार हूँ इसीलिए मुझे रख लीजिये।"

मैनेजर: दोस्त, तुमने देर कर दी, अब से कुछ देर पहले हमने उस आदमी को रखा है, जो उसे धक्का दे कर तुमसे पहले यहाँ आया है।
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