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हरियाणा मं तीन गाँम सै "करवाण", "मरवाण" अर बीच म "कुंवारी"।

मरवाण गांम के स्कूल मं हिन्दी का एक भी टिचर नां अर कुंवारी के स्कूल मं दो हिन्दी की मैडम।

एक दिन मरवाण गांम की पंचायत कुंवारी कै स्कूल मं आकै हैडमास्टर तै कहण लागै कै गुरू जी म्हारै स्कूल मं हिन्दी का टिचर ना है थारै स्कूल तै एक टिचर भेजो।

हैडमास्टर जी नै एक मैडम नं बुलाके कहया कै मैडम जी आप कुछ दिन "मरवाण" जाओ।

मैडम मरवाण जाण तै नाट गी।

कुछ दिन पाछे करवाण गांम गी पंचायत आयी अर हैडमास्टर जी तै कहण लागै कै गुरू जी म्हारै स्कूल म हिन्दी का टिचर ना सै अर आपकै स्कूल मं दो दो हिन्दी टिचर सै एक टिचर की व्यवस्था करवावो।

हैडमास्टर जी नै फेर मैडम बुलाई, दूसरी मैडम अपसैन्ट थी, वाही मैडम फेर फसगी। गुरू जी बोल्ये, "देखो मैडम "मरवाण" जाण तै तो आप नाटगी पर अब "करवाण" जाणा पड़गा।

मैडम छोह मं आगी बोली, "यो ल्यो जी मेरा रैजींगलैशन लैटर मनै या नौकरी नही करणी।"

गुरू जी बोल्या, "के बात मैडम?"

मैडम बोली, "जी मनै थारा यो रोजगा पंगा कोन्या समझ मं आव मनै नौकरी नहीं करणी।"

गुरूजी बोल्या, "देख मैडम "करवाण" तूं ना जांदी, "मरवाण" तूं नहीं जांदी पर "कुंवारी" तनै मैं भी ना छोडूं।
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