एक बार एक आदमी सड़क किनारे बैठ कर बीड़ी पी रहा था, तभी वहां संता आता है और उस आदमी से कहता है, "भाई, नशा करना छोड़ दो और मेरे साथ चलो मै तुम्हे दिखाता हूँ ज़िन्दगी कितनी खूबसूरत है!"

उस आदमी ने बीड़ी फेंक दी और संता के पीछे चल दिया!

थोड़ी और आगे जाने के बाद संता को और उस आदमी को एक पठान मिलता है जो की पेड़ के नीचे बैठ कर चरस पी रहा होता है, उसको देख संता उससे भी कहता है,"भाई, नशा करना बुरी बात है, मेरे साथ चलो मैं तुम्हें दिखाता हूं कि ज़िन्दगी कितनी खूबसूरत है!"

पठान भी चरस फेंकता है और संता के पीछे-पीछे चल पड़ता है!

थोड़ी और आगे जाने के बाद संता को बंता दिखाई देता है, जो की शराब पी रहा होता है, बंता को देख संता उससे भी कहता है, " देखो भाई नशा करना बुरी बात है, मेरे साथ चलो मैं तुम्हें दिखाता हूं कि ज़िन्दगी कितनी खूबसूरत है!"

संता की बात सुन बंता अपना पैग मेज पर रख देता है और संता को पीटने लगता है!

यह सारा तमाशा देख पठान को गुस्सा आ जाता तो वह बंता से कहता, "तुम क्यों इस नेक इंसान को पीट रहे यह तो तुम्हारे भले के लिए ही कह रहा है!"

पठान की बात सुन बंता जवाब देता है, " भला-वला गया भाड़ में, इस साले ने कल भांग पीकर मुझे भी ऐसे ही 3 घंटे तक सारे शहर में पैदल घुमाया था!"
पठान ने अपनी बेगम को अस्पताल में भर्ती कराया। तभी उसका दोस्त वहाँ आया और पूछा, "क्या हुआ भाभी को?"

पठान: ओए क्या बताऊँ यार, बाथरूम में नहा रही थी, और अचानक चक्कर खा कर गिर गई, सिर जमीन से जा टकराया, खून ही खून यार।

दोस्त: ओह यार, बहुत बुरा हुआ, अब कैसी है?

पठान: अब तो ठीक है डॉक्टर ने कहा कि अगर और थोडी देर हो जाती तो कोमा में जा सकती थी।

दोस्त: फिर भाभी ने तुमको आवाज लगाई कैसे?

पठान: ओ पागल वो बेचारी, आवाज कहाँ से लगाती? बेहोश पडी थी, वो तो अच्छा हुआ सामने वाले मकान से सिंधी भाई उसको नहाते हुए देख रहे थे। उसी ने आकर हमको बताया वरना ना जाने क्या हो जाता? खुदा भला करे सिंधी का। वरना आजकल तू ही बता यार इतने अच्छे पडोसी कहाँ मिलते हैं?
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