बेटा: पापा 'पॉलिटिक्स' क्या है?

बाप: तेरी माँ घर चलाती है उसे सरकार मान लो!

मैं कमाता हूँ मुझे कर्मचारी मान लो

कामवाली काम करती है उसे मजदूर मान लो!

तुम देश की जनता!

छोटे भाई को देश का भविष्य मान लो!

बेटा: अब मुझे 'पॉलिटिक्स' समझ में आ गयी पापा!

कल रात मैंने देखा की कर्मचारी मजदूर के साथ किचन में मज़े ले रहा था!

सरकार सो रही थी!

जनता की किसी को फ़िक्र नहीं थी और देश का भविष्य रो रहा था!
एक आदमी और एक औरत दोनों की कारों का आपस में ज़बरदस्त एक्सीडेंट हो जाता है। किस्मत से दोनों अपनी कारों से सही सलामत बाहर निकलते हैं।

महिला कारों की तरफ हैरत से देखकर आदमी से बोलती है, "देखो हमारी कारों की क्या हालत हो गई है और हम दोनों को कुछ नहीं हुआ। लगता है ऊपर वाला हमें संकेत दे रहा है कि हम दोनों को दोस्त बन जाना चाहिए और एक दूसरे को दोष देने में नहीं उलझना चाहिए।"

आदमी कहता है, "हाँ मैं बिलकुल सहमत हूँ।"

महिला अपनी कार से सड़क पर लुढक कर आई एक बोतल की तरफ इशारा करके बोली, "देखो ये मेरी स्कॉच की बोतल भी टूटने से बच गई। ये भी उपरवाले का ही संकेत हो सकता है कि हमें इसे खोलकर इसी वक्त सेलिब्रेट करना चाहिए।"

यह कहकर उसने अपनी गाड़ी की पिछली सीट से गिलास निकालकर उस आदमी को थमा दिया जो रज़ामंदी में मुंडी हिलाता हुआ अपने आप को आराम देने के लिए झटपट दोनों बोतल खाली कर गया। उसकी दूसरी बोतल खाली हुई ही थी कि महिला ने एक और बोतल खोल कर झट से उसके हाथ में रख दी।

आदमी ने पूछा, "क्या हुआ तुमने तो एक घूँट भी नहीं लिया। किसका इंतज़ार कर रही हो?"

महिला ने जवाब दिया, "नहीं, मैं बस पुलिस का इंतज़ार कर रही हूँ।"
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