एक बार एक मरता हुआ पति अपनी पत्नी से अपराध स्वीकारोक्ति करते हुए बोला।

पति: प्रिये, दो साल पहले अलमारी से तुम्हारा गोल्ड सेट मैंने ही चोरी किया था।

पत्नी (रोते हुए): कोई बात नहीं जी।

पति: एक साल पहले तेरे भाई ने तुझे जो 1 लाख रूपए दिए थे वो भी मैंने ही गायब किये थे।

पत्नी: कोई बात नहीं मैंने आपको माफ़ किया।

पति: तेरी कमेटी के पैसे भी मैंने ही चोरी किये थे।

पत्नी: कोई बात नहीं जी, आपको ज़हर भी मैंने ही दिया है इसलिए हिसाब बराबर।
पत्नी:खाने में क्या बनाऊँ?

पति: कुछ भी बना लो क्या बनाओगी?

पत्नी: जो आप कहो।

पति: दाल चावल बना लो।

पत्नी: सुबह ही तो खाए थे।

पति: तो रोटी सब्जी बना लो।

पत्नी: बच्चे नहीं खायेंगे।

पति: तो छोले पूरी बना लो।

पत्नी: मुझे तली हुई चीजों से परहेज़ है।

पति: तो अंडा भुर्जी बना लो।

पत्नी: आज बृहस्पतिवार है।

पति: पराठे?

पत्नी: रात को पराठे नहीं खाने चाहिए।

पति: कढी-चावल?

पत्नी: दही नहीं है।

पति: इडली सांभर?

पत्नी: समय लगेगा न, पहले बोलना था।

पति: होटल से मंगवा लेते हैं।

पत्नी: रोज़ रोज़ बाहर का खान ठीक नहीं है।

पति: अच्छा मैग्गी बना लो।

पत्नी: पेट नहीं भरेगा।

पति: तो फिर क्या बनाओगी?

पत्नी: जो आप कहो।
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