बंता को आत्मघाती हमलावर दस्ते में नियुक्त किया गया उसे एक मिशन दिया गया कि शत्रुओं के खेमें में जाकर अपने आप को मार दे!

उसके उच्च अधिकारी ने उसे बहुत से हथियार दे दिए और कुछ बम उसके शरीर से बांध दिए और एक मोबाइल दिया जिससे उनकी बातचीत होती रहे! वह जैसे ही शत्रुओं के खेमें में पहुंचा उसने अपने बॉस को फ़ोन किया!

सर यहं पर दो शत्रु सैनिक है क्या मैं अब खुद को मार दूँ!

उच्च अधिकारी: नही केवल दो सैनिकों के लिए नही रुको जब तक काफी सैनिक न इकट्ठे हो जाये!

बंता: अब जहाँ में खड़ा हूँ वहां लगभग 25-30 सैनिक खड़े है क्या अब मार दूँ? उच्च अधिकारी: नही थोड़े और बढ़ने दो!

बंता: अब मेरे चारों ओर कोई 100 सैनिक है क्या में अब खुद को मार दूँ!

उच्च अधिकारी: हाँ बिल्कुल... आगे बढ़ो... बहादुरी से लड़ो.. देश के लिए जान दे दो... बंता ने चाकू निकाला और अपनी छाती पर मार दिया!
एक बार बंता लुधिआना गया, वह घंटाघर वाली गली से होकर गुजर रहा था उसकी नजर घंटेघर की घड़ी पर पड़ी तो एक आदमी ने उसे पूछ लिया साहब क्या इस घड़ी को खरीदोगे?

बंता ने कहा बिल्कुल उस आदमी ने कहा तो फिर निकालिये 1000 रुपया, और थोड़ी देर रुकिए मैं सीढ़ी लेकर आता हूँ!

बंता ने उस आदमी को 1000 रुपया दे दिया और वह आदमी वहां से गायब हो गया बंता काफी देर तक वहां उसका इन्तजार करता रहा पर वह आदमी नहीं आया और बंता भी वहां से चला गया!

अगले दिन बंता फिर वहीँ से गुजर रहा था तो उस आदमी ने फिर उसे घड़ी खरीदने कि बात कही आदमी ने कहा तो निकालो फिर 1000 रूपया और मैं सीढ़ी लेकर आता हूँ!

बंता ने उसे 1000 रूपए दिए और कहने लगा मैं मूर्ख नहीं हूँ, आज तुम यहाँ इन्तजार करो और मैं सीढ़ी लेकर आता हूँ!
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