एक ट्रेन मेँ एक पंडित एक गुज्जर एक बनिया और एक जाट सफर कर रहे थे।

पंडित ने रौब झाडते हुऐ 100 का नोट निकाला और उस पर तम्बाकू डाल कर उसको बीडी बना कर पीने लगा।

फिर गुज्जर ने 500 का नोट निकाला उसने भी पंडित की तरह बीडी बनायी और पीने लगा।

अब बनिया कहाँ पीछे रहने वाला था, उसने 1000 का नोट निकाला और बीडी बनाकर पीने लगा।

अब आ गयी जाट की बारी।

जाट ने चेकबुक निकाली एक करोड की रकम भर के चेक की बीडी बनायी और पीने लगा।

सब बेहोश और जाट मदहोश!
एक बालक जिद पर अड़ गया... बोला कि छिपकली खाऊंगा।

घरवालों ने बहुत समझाया पर नहीं माना।

हार कर उसके गुरु जी को बुलाया गया। वे जिद तुड़वाने में महारथी थे।

गुरु के आदेश पर एक छिपकली पकड़वाई गई. उसे प्लेट में परोस बालक के सामने रख गुरु बोले, ले खा... बालक मचल गया।

बोला, तली हुई खाऊंगा।

गुरु ने छिपकली तलवाई और दहाड़े, ले अब चुपचाप खा. बालक फिर गुलाटी मार गया और बोला, आधी खाऊंगा।

छिपकली के दो टुकड़े किये गये। बालक गुरु से बोला, "पहले आप खाओ"।

गुरु ने आंख नाक और भी ना जाने क्या क्या भींच किसी तरह आधी छिपकली निगली गुरु के छिपकली निगलते ही बालक दहाड़ मार कर रोने लगा और बोला," आप तो वो टुकड़ा खा गये जो मैंने खाना था।

गुरु ने धोती सम्भाली और वहां से भाग निकले कि अब जरा भी यहां रुका तो ये दुष्ट दूसरा टुकड़ा भी खिला कर मानेगा।

यह देख मुझे अरविन्द केजरीवाल की याद आ गयी।

करना-धरना कुछ नहीं,नौटंकी दुनिया भर की।
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